इस गिरगिट के रंग सात

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इस सतरंगी दुनिया मे,एक अनोखी जात
नित बदल कर रूप धरे,ये चम्चों की बात
बलि चढें सही-गलत, ये ऐसी बुनते घात
कब तक बकरेखैर करें,संग कसाई जात।

जैसे कसाई घाँस दे,बकरे को दिन रात
महाजन सूद बढे,खातों मे बेबात
चले नीम हकीम संग,ओझा की मुलाकात
वैसी चम्चों की संगत,ये आस्तिन के साँप

पहले नियति से पाते,चम्चा गिरि सौगात
दूजी खानदानी है, कुछ चम्चों की जात
तीजें चम्चे हैं बनें,देख इनकी जमात
चौथे मजबूरन करें, चम्चों जैसी बात।

इसलिये सतर्क रहो, चुपके देखो बिसात
इनके सम्मुख मत करो,ऐसी वैसी बात
ये शब्द का अनर्थ कर, दुख भी देते साथ
ये धूर्त हैं इनसे कर,बेमन हँसकर बात।

चम्चों संग हसते रहो,छोडो सब जज्बात
पालिस बिना न चमकती,किस्मत संगत- बात
देश भक्त प्रथम सेवक,जय हो चम्चा जात
आघ सेर का पात्र ये,सारा सेर समात,

चम्चों से चम्चा मिले, करके लम्बे हाथ
इनकी हाँडी मे पके,छत्तीस ऐसी बात
दो चार इधर की उधर, नमक मिर्च के साथ
इनका खाना तब पचे,जब ‘कै’ करते बात।

मौके पर ये दें चढा,मोटी सी सौगात
नम्बर पाने घर चलें,मक्खन लेकर साथ
बौस की तुस्टि नब्ज पढ़ते,क्या दिन क्या रात
इसी मंतर से दें पल्ट,सबकी ये औकात।

घुट्टी ऐसी दें मिला,प्रभाव दिखे तत्काल
सौ सुख -दुख निर्माण करे,देख मिला कर हाथ
बिगडी को यूँ सुल्टे,गधा शेर हो जाये
बिन काम के दाम बढे,गधा पकोडे खाये।

दो चम्चों के मेल से, तिल-ताड़ बन जाय
हाथी भी चुहा लगे, शेर सलाम बजाये
करें हँस कर सर्जरी, दें ऐछिक रुप बना
हँसी अमृत ना समझ,कब पलट जहर बन जाये।

दे साँच पर आँच चढा, बेहक करते काम
सौ देवों मे यह देव, चम्चे सबके नाथ
हर मौषम रहे बसंत, रखदें जिसके हाथ
बिगडी तो जहर है, इस गिरगिट के रंग सात।

किसके नम्बर सात हैं, किसके बनते आठ
कौन छाँछ को पी रहा,कौन मलाई चाट
फिकर चन्द को रोग यह,नजर रखें हर बाट
अंक मस्ती के भी है, अगर हो चम्चा साथ।

ऊँची कुर्सी पर ये,रहते कुण्डली साध
देख पलटती सत्ता को,ढीले कर दें हाथ
चिकनी,चुपडी,चाट,चटक,सब दाव चला ये
इक दिन हाँडी फूटेगी, इनको दो समझा।

 

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