तुम्हें चाहना ही तो काम है मेरा
बड़ी मन्नतो से ज़िन्दगी को पाया है।।

तुम्हारे पास हर किसी के लिए वक़्त है, लेकिन तुम्हें ये याद नहीं है। कोई और भी है तुम्हारी ज़िन्दगी में। सच ही कहते है लोग, ये प्यार सब शुरू में ही होता है।

मनीष के दरवाज़ खोलते ही, पायल उसको कुछ कहने का मौक़ा नहीं देती। ग़ुस्से से तिलमिलायीं पायल कहते हुए रोना शुरू कर देती है। पायल तुम मुझे कुछ भी कह सकतीहो। मेरी हर ग़लती पर मुझे डाँटने का हक़ है तुम्हें। तुम्हारे आँसू देखने पड़े ऐसी सज़ा मतदिया करो। जानता हूँ, तुम मेरा इंतज़ार कर रही थी।तुम कैसे कह सकती हो, मैं भूल गया कि मेरी ज़िन्दगी में कोई और है। तुम ख़ुद को कोई और कैसे कह सकती हो? क्या अपनी साँसे भी अजनबी होती है। मैं ख़ुद को भूल जाऊँ ये एक पल के लिए ये हो भी जाए। लेकिन तुम्हें भुलाकर कहाँ जाऊँगा। मनीष पायल को गले से लगा लेता है।

मनीष ये कैसा प्यार करते हो? बताओ आज क्या है? सिर्फ़ तुम्हें अपने साथ चाहती थी।कभी-कभी लगता है, जैसे तुम्हें देख सकती हूँ। लेकिन तुम्हें खो दिया हो मैंने।

मनीष प्यार से पायल के माथे पर किस करता है। पायल तुम मुझे कैसे खो सकती हो।तुम पास ना भी हो तो भी मैं तुम्हारा ही रहूँगा। ज़िन्दगी की कुछ उलझने है, जो कमबख़्त हमारे प्यार से जलती है। वही है, जो तुम्हें मुझसे दूर करने की कोशिश करती है।

पायल तुम मेरे दिल की वो झनकार हो, जो धड़कन सी हर वक़्त मेरे अंदर सुनाई देती है।वैसे तुम ग़ुस्से में बेहद ख़ूबसूरत लगती हो। जानता हूँ, तुम कहोगी ये शाहरुख़ की फ़िल्म का डाइयलोग है।शाहरुख़ ने दिल की बात पहले कह दी क्या करूँ।

पायल मुस्कुरा जाती है, और उठकर वहाँ से जाने लगती है। तुम हमेशा ऐसी ही मीठी बातें करके मुझे बना लेते हो।

मनीष पायल को रोक लेता है….दोनों शांत हो जाते है। आज ही मैंने तुम्हें देखा था। हम मिले थे…एक दूसरे के हुए थे। मनीष हल्के से पायल के कान में उसे आज के दिन की ख़ासियत बताता है।

पायल बहुत ख़ुश हो जाती है। तुम्हें याद था फिर तुमने सुबह से कुछ कहा क्यों नहीं। मुझे परेशान करके ऐसे दुःखी करके क्या ख़ुशी मिली तुम्हें? ये नौकरी जो कर ली है…तुमसे दूर रहने की मजबूरी है। तुम ही बताओ बीवी कैसे मनाऊँ तुम्हें। क्या सज़ा देना चाहती हो।वैसे तुम्हारे लिए मेरे बैग में कुछ है। पायल बैग की तरफ़ जाती है, मनीष उसे जाने नहीं देता। जो भी है वो तुम्हें कल मिलेगा।

प्लीज़ बता भी दो मनीष क्या है। मनीष बैग से एक गुड़िया निकलता है। ये बार्बी डॉल है।पायल की आँखों में आँसू आ जाते है। तुम्हें मेरी हर बात कैसे याद रहती है।मेरी बीवी कीहर ख़्वाहिश ही ऐसी है कैसे भूल सकता हूँ। (पायल ने अपने बचपन में बहुत बुरे दिन देखे थे। जो उसने मनीष से साझा किए) तुमने मेरा दिन बहुत ख़ास बना दिया।

मनीष पायल को अपने गले से लगा लेता है…..एक दूसरे के लिए हम है। हमारे लिए हमारा प्यार। तुम्हारी हर बात अच्छे से याद है…..मनीष कुछ करे उससे पहले पायल उसको दूरकर देती है। खाना भी है…. आज के लिए यही सज़ा है।

Author

दिप्ती सिंह कन्हैया जी के शहर मथुरा से हे। पेशे से सॉफ़्ट्वेर इजिनियर है। कहानियाँ, कविता और ग़ज़ल लिखने का शौक़ रखती हे।

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