कुछ पेड लगा – Hindi Poetry
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कुछ पेड लगा – Hindi Poetry

Bijender Singh Bhandari - Jun 26, 2017

हरियाली की हत्या कर डाली 'डाली-डाली' यहाँ काट डाली विकास कार्य से कंक्रीट बढा कर धरा विनाश की नीव धर…

“नेक गय्या” – Poetry
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“नेक गय्या” – Poetry

Bijender Singh Bhandari - May 16, 2017

इक दिन 'बछिया' बोली गय्या से मय्या, हम जन्में क्या पाया है? हम नर हितकारी सिंग से खुर तक क्यों…

“हिन्द की फौज” – Poetry
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“हिन्द की फौज” – Poetry

Bijender Singh Bhandari - May 03, 2017

हम नम्र को नमन,मित्र को अर्पण हिमालय जैसी भारतिय फौज है आँच ना आये, हमवतन चैन लो तिरंगे की सौं,प्रथम…

उलझने – 2 : Deepti Singh
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उलझने – 2 : Deepti Singh

Deepti Singh - Apr 02, 2017

अगले दिन(ऑफ़िस में)..... सलोनी बहुत शांत अपने डेस्क पर काम कर रही है। उसकी आँखों से कोई भी साफ़ बता…

“नदी अपेक्षा करती है” – Poetry
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“नदी अपेक्षा करती है” – Poetry

Bijender Singh Bhandari - Mar 25, 2017

"नदी अपेक्षा करती है" हिमगिरि को जब गर्मी लगती है सहस्रों बूँदें रिसने लगती है मिलन जिस धरातल पर होता…

उलझने – 1 : Deepti Singh
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उलझने – 1 : Deepti Singh

Deepti Singh - Mar 23, 2017

कभी इतनी बारिश नहीं हुई, आज पता नहीं ऐसा क्या हो गया। आज कैसे भी टाइम पर ऑफ़िस पहुँच जाऊँ।सब…

#दुबारा : Deepti Singh
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#दुबारा : Deepti Singh

Deepti Singh - Mar 20, 2017

#newStory #दुबारा आज वैसे ही बहुत देर हो चुकी क्लास के लिए कीर्ति जल्दी से अपनी किताबों को समेटतीं है,…

मुलाक़ात गज़ल : Deepti Singh
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मुलाक़ात गज़ल : Deepti Singh

Deepti Singh - Mar 17, 2017

एक अजनबी सी मुलाक़ात ख़ुद के साथ हुई ज़िन्दगी के मोड़ पर मंज़िल की तलाश में खड़ी थी ख़ुद से…

तुम हम और इश्क़ : Deepti Singh
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तुम हम और इश्क़ : Deepti Singh

Deepti Singh - Mar 15, 2017

तुम्हें चाहना ही तो काम है मेरा बड़ी मन्नतो से ज़िन्दगी को पाया है।। तुम्हारे पास हर किसी के लिए…

Holi Special : आस्था  पर्व
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Holi Special : आस्था पर्व

Bijender Singh Bhandari - Mar 12, 2017

कई पर्व हैं हिन्द में हम रस लेते संग-संग क्यों गर्भ न हों बाशिंदों इस महक से जग है दंग।…