भगत देश का फिर लौटेगा

तुम काहे को रोये थे प्रियवर, भगत सिंह स्वदेश पर मरता था। जब चुमा फंदा फांसी उसने, तब कितना गदगद वो दिखता था। सात सितंबर Continue Reading

​अक्सर ऐसा क्यों होता है

​मेरे कृषि प्रधान देश मेअक्सर ऐसा क्यों होता हैकृषिक तो भूखा मरता हैसहुकार चैन से सोता है। बीज बोये कुछ थे खोखलेक्यों कोई उसको छलता Continue Reading

इस गिरगिट के रंग सात

इस सतरंगी दुनिया मे,एक अनोखी जात नित बदल कर रूप धरे,ये चम्चों की बात बलि चढें सही-गलत, ये ऐसी बुनते घात कब तक बकरेखैर करें,संग Continue Reading

अदभुत गुण सागर “माँ”

माँ की ममता का मोल नही होता करूणा भी कोई तोल नही सकता माँ की मधुर डाँट रस्ते बुनती है दुर्गम पथ आशीष लिये कटते Continue Reading

ऐसे पराक्रमी को नमन हमारा

संगीन थामे तुम सीना चौडा कर गर्जते-शेर की मानिंद चलते हो दुश्मन देखे, उसे कम्पन हो जाती हमवतनों का हौंसला बढता है। कभी पल्ख झपकी Continue Reading

मेरी अभिलाषा

व्यर्थ जीवन गया, क्या दुनियाँ को दिया? क्यों जन्मा था ? क्यों रहे याद हमारी? शहादत न सही, कुछ करता हितकारी युगों तक ‘जय’ करती, Continue Reading