इस गिरगिट के रंग सात

इस सतरंगी दुनिया मे,एक अनोखी जात नित बदल कर रूप धरे,ये चम्चों की बात बलि चढें सही-गलत, ये ऐसी बुनते घात कब तक बकरेखैर करें,संग कसाई जात। जैसे कसाई घाँस...

ऐसे पराक्रमी को नमन हमारा

संगीन थामे तुम सीना चौडा कर गर्जते-शेर की मानिंद चलते हो दुश्मन देखे, उसे कम्पन हो जाती हमवतनों का हौंसला बढता है। कभी पल्ख झपकी कि मौत हो सम्मुख सदा...

मेरी अभिलाषा

व्यर्थ जीवन गया, क्या दुनियाँ को दिया? क्यों जन्मा था ? क्यों रहे याद हमारी? शहादत न सही, कुछ करता हितकारी युगों तक 'जय' करती, ये दुनियाँ सारी। हजरत मुझे...

तेेरी दौलत – Hindi Poetry

हमदर्द खाक पर दिखा नही ना स्वर उठा 'यह बुरा हुआ' मन मे हर्ष-आँसू "मगर के' तुमसा कंगाल न कोई मरा, जोड़ के पैसा -हाय पैसा अन्तिम क्षण तक हाय पैसा बहुत बडा है  पैसा,लेकिन सभी कुछ नही होता पैसा।   तेरी दौलत, तेरे बच्चे बच्चे भी कुछ हों-पर अच्छे पैसा क्या है?मैल बराबर खतरे का संकेत बराबर मानस जन्मा पारस जैसा तू बन जा बापू के जैसा बच्चे बने श्रवण के जैसा घर होगा मन्दिर के जैसा।   मान खरीद, ईमान खरीद पैसा मिला,अभिमान खरीद सभी दुर्लभ सामान...
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