उलझने-1-deepti-singh
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उलझने – 2 : Deepti Singh

अगले दिन(ऑफ़िस में)….. सलोनी बहुत शांत अपने डेस्क पर काम कर रही है। उसकी आँखों से कोई भी साफ़ बता सकता है। वो ...
उलझने-1-deepti-singh
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उलझने – 1 : Deepti Singh

कभी इतनी बारिश नहीं हुई, आज पता नहीं ऐसा क्या हो गया। आज कैसे भी टाइम पर ऑफ़िस पहुँच जाऊँ।सब कुछ आज ही ...
दुबारा-deepti-singh
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#दुबारा : Deepti Singh

#newStory #दुबारा आज वैसे ही बहुत देर हो चुकी क्लास के लिए कीर्ति जल्दी से अपनी किताबों को समेटतीं है, जो लाइब्रेरी की ...
मुलाक़ात-गज़ल-deepti-singh
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मुलाक़ात गज़ल : Deepti Singh

एक अजनबी सी मुलाक़ात ख़ुद के साथ हुई ज़िन्दगी के मोड़ पर मंज़िल की तलाश में खड़ी थी ख़ुद से ही पता पूछ ...
तुम-हम-और-इश्क़-deepti-singh
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तुम हम और इश्क़ : Deepti Singh

तुम्हें चाहना ही तो काम है मेरा बड़ी मन्नतो से ज़िन्दगी को पाया है।। तुम्हारे पास हर किसी के लिए वक़्त है, लेकिन ...