​अक्सर ऐसा क्यों होता है

​मेरे कृषि प्रधान देश मेअक्सर ऐसा क्यों होता हैकृषिक तो भूखा मरता हैसहुकार चैन से सोता है। बीज बोये कुछ थे खोखलेक्यों कोई उसको छलता हैजो माटि 'सिर' धर है...

इस गिरगिट के रंग सात

इस सतरंगी दुनिया मे,एक अनोखी जात नित बदल कर रूप धरे,ये चम्चों की बात बलि चढें सही-गलत, ये ऐसी बुनते घात कब तक बकरेखैर करें,संग कसाई जात। जैसे कसाई घाँस...

“नदी अपेक्षा करती है” – Poetry

"नदी अपेक्षा करती है" हिमगिरि को जब गर्मी लगती है सहस्रों बूँदें रिसने लगती है मिलन जिस धरातल पर होता है नदी वहीं से बहने लगती है। बूँद-बूँद की संयुक्त...
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